1 हजार रुपए बने 49 करोड़ रुपए, जानिए निवेशकों को कैसे मिला इतना रिटर्न
1 हजार रुपए बने 49 करोड़ रुपए, जानिए निवेशकों को कैसे मिला इतना रिटर्न
नई दिल्ली.अपने पैसे को बढ़ते हुए देखना हर आदमी का सपना होता है। हालांकि कई बार रकम इतनी बढ़ जाती है, जिसका सपना पैसा लगाने वाले ने भी नहीं देखा होता है। एक आईटी कंपनी ने निवेशकों को ऐसा ही रिटर्न दिया है। 35 साल के दौरान इस कंपनी में लगाए हर 1000 रुपए अब बढ़कर49करोड़ रुपए बन चुके हैं। कैसे मिला इतना रिटर्न -स्टॉक मार्केट में रिटर्न कई तरीकों से बढ़ सकता है। इसमें स्टॉक में बढ़त के साथ बोनस इश्यू,स्टॉक स्पिलिट के साथ साथ डिविडेंड भी शामिल होतें हैं। -विप्रो में इन सभी सेग्मेंट में एक्शन देखने को मिल चुका है। कंपनी ने स्टॉक में तेजी के साथ साथ स्टॉक स्पिलिट और बोनस इश्यू का लगातार ऐलान किया है। -इसके साथ ही कंपनी ने लगातार डिविडेंड भी बांटा है।
विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने दो साल पहले स्टूडेंट्स के साथ बातचीत में कहा था कि उनके पिता हशम प्रेमजी ने विप्रो की शुरुआत की थी. उन्होंने यह भी कहा था कि मुझे लगता है कि मैंने सिर्फ उत्पादों की रेंज बढ़ाई है. यह दिखाता है कि वे कितने विनम्र हैं. उन्होंने 1966 में पिता के देहांत के बाद विप्रो की कमान संभाली थी. पांच दशक से ज्यादा समय से वे विप्रो का नेतृत्व कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने न सिर्फ विप्रो को एक बड़ी आईटी कंपनी बनाई बल्कि उद्योग की दुनिया में परोपकार की मिशाल कायम की.
साबुन-तेल के बिजनेस को बना दी दिग्गज आईटी कंपनी
विप्रो का पुराना नाम वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स था. यह महाराष्ट्र के अमालनर में स्थित थी. तब इसका कारोबार तेल-साबुन जैसे उत्पादों तक सीमित था. 1966 में अजीम प्रेमजी के पिता का देहांत हो गया. इसके चलते उन्हें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत आना पड़ा. उन्होंने कंपनी की बागडोर अपने हाथ में ली.
साबुन-तेल के बिजनेस को बना दी दिग्गज आईटी कंपनी
विप्रो का पुराना नाम वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स था. यह महाराष्ट्र के अमालनर में स्थित थी. तब इसका कारोबार तेल-साबुन जैसे उत्पादों तक सीमित था. 1966 में अजीम प्रेमजी के पिता का देहांत हो गया. इसके चलते उन्हें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत आना पड़ा. उन्होंने कंपनी की बागडोर अपने हाथ में ली.
1981 में रखा आईटी के क्षेत्र में कदम
कई सालों तक सफलतापूर्वक कंपनी चलाने के बाद अजीम प्रेमजी कुछ नया करना चाहते थे. तब भारत में एक तरह से कंप्यूटर की शुरुआत ही हुई थी. उन्हें लगा कि भविष्य में कंप्यूटर काम करने का तरीके में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने 1981 में कंप्यूटर बिजनेस सी शुरुआत की. अगले साल तक उन्होंने अपना पूरा ध्यान आईटी प्रोडक्ट्स बिजनेस पर लगा दिया.
कई सालों तक सफलतापूर्वक कंपनी चलाने के बाद अजीम प्रेमजी कुछ नया करना चाहते थे. तब भारत में एक तरह से कंप्यूटर की शुरुआत ही हुई थी. उन्हें लगा कि भविष्य में कंप्यूटर काम करने का तरीके में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने 1981 में कंप्यूटर बिजनेस सी शुरुआत की. अगले साल तक उन्होंने अपना पूरा ध्यान आईटी प्रोडक्ट्स बिजनेस पर लगा दिया.
8.5 अरब डॉलर है विप्रो का रेवेन्यू
शुरुआत में प्रेमजी ने हार्डवेयर और सॉफ्टेवेयर दोनों पर फोकस रखा. बाद में उन्होंने हार्डवेयर पर फोकस घटा दिया और सॉफ्वेयर पर बढ़ा दिया. आज विप्रो देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है. पिछले कुछ सालों में इसकी ग्रोथ थोड़ी सुस्त हुई है. लंबे समय तक यह टीसीएस और इंफोसिस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी थी. पिछले साल विप्रो ने 8.5 अरब डॉलर का रेवेन्यू हासिल किया था.
शुरुआत में प्रेमजी ने हार्डवेयर और सॉफ्टेवेयर दोनों पर फोकस रखा. बाद में उन्होंने हार्डवेयर पर फोकस घटा दिया और सॉफ्वेयर पर बढ़ा दिया. आज विप्रो देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है. पिछले कुछ सालों में इसकी ग्रोथ थोड़ी सुस्त हुई है. लंबे समय तक यह टीसीएस और इंफोसिस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी थी. पिछले साल विप्रो ने 8.5 अरब डॉलर का रेवेन्यू हासिल किया था.
विप्रो एंटरप्राइजेज के तहत आते हैं कई कारोबार
कंज्यूमर गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग और मेडिकल डिवाइसेज बिजनेस विप्रो एंटरप्राइजेज के तहत आते हैं. इसका सालाना रेवेन्यू 2 अरब डॉलर था. 74 वर्षीय अजीम प्रेमजी 31 जुलाई को चेयरमैन और एमडी का पद छोड़ देंगे. लेकिन, वे बतौर फाउंडर चेयरमैन और डायरेक्टर कंपनी के बोर्ड में बने रहेंगे.
कंज्यूमर गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग और मेडिकल डिवाइसेज बिजनेस विप्रो एंटरप्राइजेज के तहत आते हैं. इसका सालाना रेवेन्यू 2 अरब डॉलर था. 74 वर्षीय अजीम प्रेमजी 31 जुलाई को चेयरमैन और एमडी का पद छोड़ देंगे. लेकिन, वे बतौर फाउंडर चेयरमैन और डायरेक्टर कंपनी के बोर्ड में बने रहेंगे.
हमेशा साथियों पर किया भरोसा
प्रेमजी के सफर में उतार-चढ़ाव कम नहीं रहा है. लेकिन, कभी उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने हमेशा अपने साथियों पर भरोसा किया. अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सीईओ दिलीप रंजेकर कहते हैं, "वे कभी हार नहीं मानने वाले व्यक्ति हैं. दूसरी बड़ी चीज यह है कि वे जबर्दस्त पेशेवर व्यक्ति है. उन्होंने इतनी बड़ी कंपनी को हमेशा ईमानदारी और तथ्यों के आधार पर चलाया."
प्रेमजी के सफर में उतार-चढ़ाव कम नहीं रहा है. लेकिन, कभी उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने हमेशा अपने साथियों पर भरोसा किया. अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सीईओ दिलीप रंजेकर कहते हैं, "वे कभी हार नहीं मानने वाले व्यक्ति हैं. दूसरी बड़ी चीज यह है कि वे जबर्दस्त पेशेवर व्यक्ति है. उन्होंने इतनी बड़ी कंपनी को हमेशा ईमानदारी और तथ्यों के आधार पर चलाया."
देश में बने परोपकार के मिसाल
आज अजीम प्रेमजी को जो बात दूसरे उद्योगपतियों से अलग करती है, वह है परोपकार में उनकी दिलचस्पी. उन्हें परोपकार के मामले में देश का सबसे बड़ा दिल वाला व्यक्ति कहना गलत नहीं होगा. उन्होंने 10 साल पहले ही परोपकार को लेकर अपनी सोच जाहिर कर दी थी. तब उद्योग जगह के मुट्ठी भर लोगों की ही चर्चा इस काम के लिए होती थी.
आज अजीम प्रेमजी को जो बात दूसरे उद्योगपतियों से अलग करती है, वह है परोपकार में उनकी दिलचस्पी. उन्हें परोपकार के मामले में देश का सबसे बड़ा दिल वाला व्यक्ति कहना गलत नहीं होगा. उन्होंने 10 साल पहले ही परोपकार को लेकर अपनी सोच जाहिर कर दी थी. तब उद्योग जगह के मुट्ठी भर लोगों की ही चर्चा इस काम के लिए होती थी.
प्रेमजी के अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने 2010 में अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी. यह नॉट-फॉर-प्रॉफिट वेंचर है. इस साल मार्च में प्रेमजी ने विप्रो के अपने 34 फीसदी शेयर अपने फाउंडेशन को दान कर दिए. अब तक वे इस फाउंडेशन को अपनी 67 फीसदी संपत्ति यानी 1.45 लाख करोड़ रुपये दान कर चुके हैं.
Sumit malik
9310666000
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